
कुछ दोस्त साथ चलते हैं, कुछ रास्ते बदल लेते हैं… मगर सच्ची दोस्ती कभी रास्ता नहीं बदलती।
“तुम्हारे जीवन में किसी ने तुम्हारे लिए सबसे नेक और सबसे अच्छा काम क्या किया?”
अगर मुझसे यह सवाल पूछा जाए, तो शायद मेरे पास इसका जवाब देने के लिए बहुत सोचने की जरूरत नहीं होगी।
मैं बस इतना कहूँगा—
“किसी ने मेरा दोस्त बनकर मेरी जिंदगी में प्रवेश किया।”
और उस एक दोस्ती ने मेरी पूरी जिंदगी का अर्थ बदल दिया।
उस दोस्त का नाम था—बिन्नू।
लेकिन आज जब मैं बिन्नू को याद करते हुए यह लिख रहा हूँ, तो महसूस हो रहा है कि यह कहानी सिर्फ बिन्नू की नहीं है।
यह कहानी उन सभी दोस्तों की है जिन्होंने कभी न कभी मेरी जिंदगी में अपना हाथ रखा।
किसी ने मुझे गिरने से बचाया।
किसी ने गिरने के बाद उठाया।
किसी ने रास्ता दिखाया।
किसी ने मेरी गलतियों पर डाँटा।
किसी ने मेरी परेशानियाँ सुनीं।
किसी ने मेरी खुशी में मुझसे ज्यादा खुशी मनाई।
किसी ने मेरी उदासी को बिना पूछे पढ़ लिया।
और कुछ ऐसे भी थे जो एक समय मेरे साथ बहुत दूर तक चले और फिर जिंदगी की अपनी-अपनी दिशाओं में निकल गए।
लेकिन आज भी जब उनकी याद आती है, तो लगता है—
वे कहाँ गए हैं?
वे तो कहीं न कहीं मेरे भीतर ही हैं।
दोस्ती आखिर होती क्या है?
दोस्ती शायद दुनिया का सबसे अनोखा रिश्ता है।
इसमें कोई खून का रिश्ता नहीं होता, फिर भी कई बार दोस्त भाई से बढ़कर हो जाता है।
कोई कानूनी बंधन नहीं होता, फिर भी एक दोस्त दूसरे के लिए अपनी जिम्मेदारियाँ उठा लेता है।
कोई शपथ नहीं होती, फिर भी दोस्त कह देता है—
“तू चिंता मत कर, मैं हूँ न!”
और कई बार जिंदगी की सबसे बड़ी राहत इसी एक वाक्य में छिपी होती है।
दोस्ती में हिसाब नहीं होता।
कितना दिया, कितना लिया—इसकी कोई गिनती नहीं होती।
वहाँ सिर्फ एक विश्वास होता है—
“मुसीबत में बुलाना मत, बस मैं आ जाऊँगा।”
और शायद यही दोस्ती की असली ताकत है।
बिन्नू—जिसने दोस्ती को जिम्मेदारी बना दिया
बिन्नू से मेरी दोस्ती उन दिनों हुई जब हम खुद बच्चे थे।
स्कूल के दिन थे।
हम दोनों को जिंदगी का कोई अनुभव नहीं था।
न भविष्य की चिंता थी, न जिम्मेदारियों का अर्थ पता था।
हम तो बस बच्चे थे—हँसते थे, खेलते थे, शरारत करते थे, लड़ते थे और फिर थोड़ी देर बाद ऐसे मिल जाते थे जैसे कुछ हुआ ही नहीं।
लेकिन उसी बचपन में बिन्नू ने मेरे जीवन में ऐसी जगह बना ली, जो समय के साथ और गहरी होती चली गई।
धीरे-धीरे वह सिर्फ मेरा दोस्त नहीं रहा।
वह मेरी ताकत बन गया।
उसने मेरी जिंदगी के बहुत से सवालों को अपने सवाल समझ लिया।
मेरी परेशानियाँ उसकी परेशानियाँ बन गईं।
मेरी जिम्मेदारियाँ उसकी जिम्मेदारियाँ बन गईं।
और सबसे बड़ी बात—
वह मेरे बारे में मुझसे बेहतर सोचता था।
जहाँ मैं खुद को कम समझता था, वहाँ वह मुझे ज्यादा समझता था।
जहाँ मुझे अपना रास्ता दिखाई नहीं देता था, वहाँ वह रास्ता खोज लेता था।
जहाँ मैं टूटने लगता था, वहाँ वह मुझे संभाल लेता था।
कुछ दोस्त हमारी जिंदगी जीने में हमारी मदद करते हैं
हम सबके जीवन में ऐसे दौर आते हैं जब हमें लगता है कि सब कुछ हमारे हाथ से निकल रहा है।
कभी आर्थिक परेशानियाँ।
कभी पारिवारिक जिम्मेदारियाँ।
कभी रिश्तों की उलझनें।
कभी असफलताएँ।
कभी भविष्य का डर।
और कभी-कभी जिंदगी इतनी भारी हो जाती है कि अगली सुबह की कल्पना करना भी मुश्किल लगता है।
मेरे जीवन में भी ऐसे दिन आए।
ऐसे दिन जब सवाल यह नहीं था कि समस्या कैसे हल होगी।
सवाल सिर्फ इतना था—
“क्या कल आएगा भी?”
और ऐसे समय में दोस्त का साथ केवल साथ नहीं होता।
वह जीवन की रस्सी बन जाता है।
बिन्नू ने उन्हीं दिनों मेरा हाथ पकड़ा।
हमने एक-दूसरे का हाथ थामकर जिंदगी के अच्छे-बुरे रास्ते पार किए।
कभी मैं उसे संभालता था।
कभी वह मुझे।
लेकिन एक बात हमेशा रही—
हमने एक-दूसरे का हाथ छोड़ा नहीं।
अच्छे दोस्त हमारी जिंदगी के अनकहे रक्षक होते हैं
दोस्त हमेशा बड़े काम करके ही दोस्ती साबित नहीं करते।
कभी एक फोन काफी होता है।
कभी एक कप चाय।
कभी दो शब्द—
“क्या हुआ?”
कभी कंधे पर रखा हाथ।
कभी हमारी बेवकूफी पर खुलकर हँसना।
कभी हमारी गलती पर गुस्सा करना।
कभी हमारे लिए किसी से बहस कर लेना।
कभी हमें सही रास्ता दिखाना।
कभी हमारे घर की चिंता करना।
और कभी बिना बताए हमारी जिम्मेदारी उठा लेना।
यही छोटी-छोटी चीजें बाद में जिंदगी की सबसे बड़ी यादें बन जाती हैं।
आज पीछे मुड़कर देखता हूँ तो लगता है कि मेरी जिंदगी की यात्रा में मेरे दोस्तों ने कितनी जगहों पर चुपचाप मेरी नाव को धक्का दिया है।
मैं शायद बहुत-सी मंजिलों तक इसलिए पहुँच पाया क्योंकि कहीं न कहीं कोई दोस्त मेरी नाव के किनारे खड़ा था।
मेरे दूसरे दोस्तों का भी इस सफर में अपना-अपना हिस्सा है
बिन्नू की बात करते हुए अगर मैं अपने बाकी दोस्तों को भूल जाऊँ, तो शायद यह दोस्ती के साथ अन्याय होगा।
क्योंकि मेरी जिंदगी सिर्फ एक दोस्त की कहानी नहीं है।
यह उन तमाम दोस्तों की कहानी है जिन्होंने अलग-अलग समय पर अपना-अपना किरदार निभाया।
मुशाहिद,
राजेंद्र,
प्रेम,
सोनू,
अनिल,
ज्ञान,
जसवीर,
सेंटी, मोटी ,GS,
और वे तमाम दोस्त जिनके नाम शायद इस समय मेरी जुबान पर नहीं आ रहे, लेकिन जिनकी यादें मेरे दिल की किसी न किसी अलमारी में आज भी सुरक्षित हैं।
हर दोस्त का अपना रंग था।
किसी ने दोस्ती में हँसी दी।
किसी ने मुश्किल समय में साथ दिया।
किसी ने सलाह दी।
किसी ने डाँटा।
किसी ने मेरी गलतियों को सहा।
किसी ने मेरी सफलता पर मुझसे ज्यादा खुशी मनाई।
किसी ने मेरे दुःख को अपना समझा।
और किसी ने बस इतना किया कि वह मेरे साथ रहा।
कभी-कभी यही सबसे बड़ी बात होती है।
हर दोस्त अपनी भूमिका निभाकर चला गया
जिंदगी बहुत अजीब है।
हम सोचते हैं कि जो लोग आज हमारे साथ हैं, वे हमेशा हमारे साथ रहेंगे।
लेकिन ऐसा नहीं होता।
कुछ दोस्त पढ़ाई के बाद अलग हो जाते हैं।
कुछ नौकरी के रास्ते पर निकल जाते हैं।
कुछ परिवार और जिम्मेदारियों में उलझ जाते हैं।
कुछ दूसरे शहरों में चले जाते हैं।
कुछ दूसरे देशों में।
कुछ वर्षों तक बात नहीं होती।
और कुछ तो इस दुनिया से ही चले जाते हैं।
रास्ते अलग हो जाते हैं।
लेकिन क्या दोस्ती खत्म हो जाती है?
नहीं।
सच्ची दोस्ती बातचीत बंद होने से खत्म नहीं होती।
दूरी बढ़ने से खत्म नहीं होती।
सालों तक मुलाकात न होने से खत्म नहीं होती।
क्योंकि दोस्ती की असली जगह फोन की कॉन्टैक्ट लिस्ट में नहीं होती।
वह दिल में होती है।
और दिल से हटाना इतना आसान नहीं होता।
कुछ दोस्त चले जाते हैं, लेकिन उनकी खुशबू रह जाती है
कभी-कभी कोई पुराना गीत सुनाई देता है और अचानक किसी दोस्त की याद आ जाती है।
किसी पुराने रास्ते से गुजरते हैं तो कोई चेहरा याद आता है।
स्कूल की कोई तस्वीर मिलती है तो पूरा बचपन आँखों के सामने खड़ा हो जाता है।
किसी चाय की दुकान पर बैठते हैं तो लगता है जैसे अभी कोई पीछे से आकर कहेगा—
“अबे, इतनी देर से यहाँ क्या कर रहा है?”
और हम मुस्कुरा देते हैं।
यही तो दोस्ती है।
लोग चले जाते हैं, लेकिन उनकी आवाज़ें रह जाती हैं।
उनकी हँसी रह जाती है।
उनकी डाँट रह जाती है।
उनके साथ बिताए हुए दिन रह जाते हैं।
उनकी कही हुई बातें रह जाती हैं।
और सबसे बढ़कर—
उनका एहसास रह जाता है।
फिर आया 2022…
और मेरी जिंदगी में एक ऐसी तारीख आई जिसने दोस्ती के अर्थ को हमेशा के लिए बदल दिया।
2022 में बिन्नू अचानक चला गया।
मेरे लिए यह केवल किसी दोस्त का जाना नहीं था।
यह मेरी जिंदगी के एक हिस्से के चले जाने का था।
जिस इंसान के साथ मैंने जिंदगी के कितने ही उतार-चढ़ाव देखे थे, वह अचानक मेरे सामने नहीं था।
जिस हाथ ने इतने वर्षों तक मेरा हाथ पकड़ा था, वह हाथ अब मेरे हाथ में नहीं था।
जिस दोस्त से मैं यह उम्मीद कर सकता था कि किसी भी मुश्किल में वह मेरे साथ खड़ा होगा—
वह अब इस दुनिया में नहीं था।
और शायद यह मेरे साथ बिन्नू की दोस्ती का सबसे कठिन अध्याय था—
उसका चले जाना।
जिंदगी चलती रहती है… लेकिन वैसी नहीं रहती
लोग कहते हैं—
समय हर घाव भर देता है।
मैं नहीं जानता कि यह बात कितनी सच है।
समय शायद हमें घाव के साथ जीना सिखा देता है।
घाव कहीं भीतर रह जाता है।
हम उसके साथ मुस्कुराना सीख लेते हैं।
हम काम करते हैं।
परिवार संभालते हैं।
जिम्मेदारियाँ निभाते हैं।
त्योहार मनाते हैं।
लोगों से मिलते हैं।
जिंदगी आगे बढ़ती है।
लेकिन कुछ लोगों के जाने के बाद जिंदगी में एक ऐसी जगह खाली हो जाती है जिसे कोई दूसरा भर नहीं सकता।
बिन्नू के जाने के बाद मेरे साथ भी यही हुआ।
मैं जी रहा हूँ, लेकिन वह जीवन वैसा नहीं है जैसा उसके साथ था।
कभी-कभी मैं आज भी उसे ढूँढ़ता हूँ
कभी कोई परेशानी आती है तो मन कहता है—
“बिन्नू से बात करनी चाहिए।”
फिर अचानक याद आता है—
वह तो है ही नहीं।
कभी कोई ऐसी बात होती है जिसे उसके साथ बाँटना चाहता हूँ।
फिर एक पल में वास्तविकता सामने आ जाती है।
कभी मन करता है उससे पूछूँ—
“अब क्या करूँ?”
और भीतर से जैसे उसकी आवाज आती है—
“चिंता मत कर, मैं हूँ।”
बस फर्क इतना है कि अब वह आवाज बाहर से नहीं आती।
वह मेरे भीतर से आती है।
शायद यही किसी सच्चे दोस्त की सबसे बड़ी अमरता है।
बिन्नू के बाद मैंने दोस्ती को नए अर्थ में समझा
पहले लगता था दोस्ती का मतलब साथ बैठना है।
बातें करनी हैं।
हँसना है।
घूमना है।
मस्ती करना है।
आज समझ आया—
दोस्ती का मतलब किसी के जीवन का हिस्सा बन जाना है।
इतना कि उसकी परेशानी देखकर आपकी नींद उड़ जाए।
उसकी खुशी देखकर आपका चेहरा खिल उठेगा।
उसकी असफलता आपको अपनी लगे।
उसका दर्द आपके भीतर उतर जाए।
और उसके चले जाने के बाद भी उसकी कमी आपके जीवन का हिस्सा बनी रहे।
मेरे दोस्तों के नाम—दिल से धन्यवाद
मुशाहिद, राजेंद्र, प्रेम, सोनू, अनिल, ज्ञान, जसवीर, सेंटी ,मोटी, GS…
और मेरे वे तमाम दोस्त जिनका नाम मैं यहाँ नहीं लिख पा रहा हूँ—
यह लेख शायद आपकी दोस्ती के सामने बहुत छोटा है।
शायद कुछ शब्दों में उन वर्षों को समेटना संभव भी नहीं है।
हमने जो साथ बिताया, वह किसी लेख में नहीं आ सकता।
हमने जो हँसी बाँटी, उसका कोई हिसाब नहीं।
जो दुःख बाँटे, उनकी कोई गिनती नहीं।
जो सलाह दी और ली, उसका कोई रिकॉर्ड नहीं है।
जो गलतियाँ साथ कीं, उन पर तो शायद एक अलग किताब लिखी जा सकती है!
लेकिन आज दिल से सिर्फ एक बात कहना चाहता हूँ—
धन्यवाद।
धन्यवाद कि तुम मेरे दोस्त बने।
धन्यवाद कि जिंदगी के किसी न किसी मोड़ पर तुम मेरे साथ खड़े रहे।
धन्यवाद कि जब मुझे किसी अपने की जरूरत थी, तुम अपने बनकर आए।
धन्यवाद उन हँसी के पलों के लिए।
धन्यवाद उन झगड़ों के लिए।
धन्यवाद उन बेवकूफियों के लिए।
धन्यवाद उन सलाहों के लिए।
धन्यवाद उन चुप्पियों के लिए जिनमें भी दोस्ती बोलती थी।
और धन्यवाद उन तमाम पलों के लिए जब तुमने शायद यह भी नहीं सोचा होगा कि तुम्हारा छोटा-सा साथ मेरी जिंदगी में कितनी बड़ी बात बन जाएगा।
कुछ दोस्त जिंदगी में अध्याय होते हैं, कुछ पूरी किताब
आज मुझे लगता है कि जिंदगी एक किताब है।
कुछ लोग उसमें सिर्फ एक पन्ने के लिए आते हैं।
कुछ एक अध्याय लिखते हैं।
कुछ अध्याय।
और कुछ लोग पूरी किताब का अर्थ बदल देते हैं।
बिन्नू उन लोगों में था।
लेकिन मेरे दूसरे दोस्तों ने भी इस किताब के अलग-अलग पन्नों को खूबसूरत बनाया।
किसी ने हँसी लिखी।
किसी ने संघर्ष।
किसी ने उम्मीद।
किसी ने साहस।
किसी ने दोस्ती।
किसी ने यादें।
और कुछ ने विदाई ली।
लेकिन इन सभी पन्नों को पलटते हुए आज एक बात समझ आती है—
मेरी जिंदगी की कहानी अकेले मेरी कहानी नहीं है।
इसमें मेरे दोस्तों की भी स्याही लगी है।
दोस्ती का सबसे खूबसूरत सच
हम अक्सर रिश्तों की कीमत तब समझते हैं जब वे हमारे पास नहीं रहते।
इसलिए आज, जब मेरे बहुत से दोस्त अपनी-अपनी जिंदगी में व्यस्त हैं, जब कुछ दूर हैं, जब कुछ से वर्षों से मुलाकात नहीं हुई, और जब कुछ इस दुनिया में नहीं रहे—
मैं कहना चाहता हूँ:
अगर कभी मैंने तुम्हें धन्यवाद नहीं कहा, तो आज कह रहा हूँ।
अगर कभी तुम्हारे साथ बिताए किसी पल की कीमत नहीं समझी, तो आज समझता हूँ।
अगर कभी तुम्हारी मदद को सामान्य मान लिया, तो आज महसूस करता हूँ कि वह सामान्य नहीं थी।
तुम सबने अपनी-अपनी जगह मेरी जिंदगी को आसान बनाया है।
और शायद तुम्हें पता भी नहीं कि तुमने क्या किया।
और बिन्नू… तुम्हारे लिए क्या कहूँ?
तुम्हारे लिए धन्यवाद शब्द बहुत छोटा है।
तुमने मेरे लिए सिर्फ दोस्ती नहीं की।
तुमने मेरी जिंदगी को संभाला।
बचपन से लेकर उन कठिन दिनों तक, जब जिंदगी का हर रास्ता मुश्किल लगने लगा था, तुम मेरे साथ रहे।
तुमने मुझे अपने से ज्यादा महत्व दिया।
तुमने मेरे बारे में मुझसे बेहतर सोचा।
तुमने मेरी कमजोरियों में भी मेरी ताकत खोजी।
तुमने मेरी जिम्मेदारियों में अपना हिस्सा जोड़ा।
तुमने मेरे परिवार को अपना समझा।
मेरे भाइयों के लिए खड़े हुए।
और उन दिनों में भी मेरा हाथ नहीं छोड़ा जब शायद उसे छोड़ देना आसान था।
फिर एक दिन…
तुमने मेरा हाथ छोड़ दिया।
लेकिन अपनी मर्जी से नहीं।
जिंदगी ने तुम्हें मुझसे छीन लिया।
अब तुम्हारे बिना यह सफर है… लेकिन तुम्हारी सीख के साथ
अब जिंदगी का सफर मुझे अकेले तय करना है।
जब तक मेरी आखिरी साँस है, मुझे अपनी जिम्मेदारियाँ निभानी हैं।
मुझे चलते रहना है।
गिरूँगा तो उठना है।
थकूँगा तो थोड़ा रुकना है।
फिर चलना है।
क्योंकि तुमने मुझे यही तो सिखाया था—
मुश्किल चाहे जितनी बड़ी हो, नाव को किनारे तक ले जाना है।
आज तुम नाव में मेरे साथ नहीं हो।
लेकिन तुम्हारे हाथों ने मुझे पतवार चलाना सिखा दिया है।
इसलिए मैं चलता रहूँगा।
तुम्हारी याद के साथ।
तुम्हारी दोस्ती के साथ।
तुम्हारी आवाज के साथ।
मेरे दोस्तों के नाम
मेरे दोस्तों—
तुम सबको मेरा प्रणाम।
मेरा प्यार।
मेरा आभार।
और मेरी ओर से एक छोटी-सी स्वीकारोक्ति—
मेरी जिंदगी को खूबसूरत बनाने में मेरा अकेले का कोई हाथ नहीं है।
तुम सबका हिस्सा है।
किसी का थोड़ा।
किसी का बहुत।
और किसी का इतना कि उसके बिना मैं शायद वह इंसान न होता जो आज हूँ।
कुछ दोस्त आज मेरे पास हैं।
कुछ दूर हैं।
कुछ ने रास्ते बदल लिए हैं।
कुछ अपनी दुनिया में खो गए हैं।
और कुछ हमेशा के लिए चले गए हैं।
लेकिन मेरी यादों में तुम सबके लिए जगह है।
क्योंकि—
दोस्तियाँ खत्म नहीं होतीं।
वे बस अपनी जगह बदल लेती हैं।
कभी साथ बैठने से यादों में चली जाती हैं।
कभी बातचीत से तस्वीरों में।
कभी तस्वीरों से आँखों में।
और कभी आँखों से सीधे दिल में।
शायद दोस्ती यही है…
किसी के जीवन में जाकर उसे यह एहसास देना—
“तुम अकेले नहीं हो।”
और फिर वर्षों बाद, जब वह व्यक्ति पीछे मुड़कर देखे, तो उसे महसूस हो—
“हाँ, मैं कभी अकेला था ही नहीं।”
मेरे जीवन में ऐसे लोग आए।
उनमें सबसे खास था मेरा बिन्नू।
और उसके साथ-साथ मेरे वे तमाम दोस्त जिन्होंने अपने-अपने हिस्से की दोस्ती निभाई।
आज मैं किसी से कुछ नहीं माँगता।
न कोई शिकायत।
न कोई गिला।
बस दिल से एक बात कहना चाहता हूँ—
मेरे दोस्तों, बहुत-बहुत धन्यवाद।
यह छोटा-सा लेख तुम्हारी दोस्ती, तुम्हारे प्रेम, तुम्हारे भरोसे और तुम्हारे साथ के सामने शायद कुछ भी नहीं।
फिर भी इसे मेरी ओर से—
तुम सबकी दोस्ती के नाम एक छोटा-सा सलाम समझ लेना।
और अंत में… बिन्नू के नाम
कहते हैं—
“कुछ रिश्ते नाम के मोहताज नहीं होते,
कुछ लोग पास होकर भी दूर होते हैं,
और कुछ दूर होकर भी हर पल साथ रहते हैं।”
तुम दूर हो बिन्नू।
बहुत दूर।
लेकिन मेरी जिंदगी के हर उस मोड़ पर जहाँ मैंने खुद को संभाला है, मुझे तुम्हारी परछाईं दिखाई देती है।
तुम्हारी दोस्ती मेरे लिए कोई पुरानी कहानी नहीं है।
वह मेरी जिंदगी का हिस्सा है।
तुम्हारे जाने के बाद मैंने जाना कि किसी अपने को खोना क्या होता है।
और तुम्हें याद करते हुए मैंने यह भी जाना कि सच्ची दोस्ती मृत्यु से बड़ी होती है।
क्योंकि शरीर चला जाता है।
आवाज चली जाती है।
साथ छूट जाता है।
लेकिन—
जिसने किसी की जिंदगी को छुआ हो, वह उस जिंदगी से कभी पूरी तरह नहीं जाता।
तुम मेरे साथ नहीं हो।
लेकिन तुम मेरी यादों में हो।
मेरी आदतों में हो।
मेरी सोच में हो।
मेरी हिम्मत में हो।
मेरी जिम्मेदारियों में हो।
और शायद मेरी हर उस साँस में हो जो मुझे कहती है—
“चल… अभी सफर बाकी है।”
मेरे दोस्त बिन्नू—
जहाँ भी हो, खुश रहना।
ईश्वर तुम्हारी आत्मा को शांति दे।
और अगर कहीं से मेरी आवाज तुम तक पहुँचती हो, तो आज बस इतना सुन लेना—
तुमने मेरे लिए जो किया, उसका कर्ज मैं कभी चुका नहीं सकता।
और मेरे तमाम दोस्तों—
मुषाहिद, राजेंद्र, प्रेम, सोनू, अनिल, ज्ञान, जसवीर,सेंटी , मोटी ,GS, और मेरे हर उस दोस्त के नाम जिसे मैंने कभी दोस्त कहा—
आज दिल से कहता हूँ:
बहुत-बहुत शुक्रिया।
तुम सबने मेरी जिंदगी में अपनी-अपनी रोशनी छोड़ी है।
कुछ रोशनियाँ आज भी मेरे साथ हैं।
कुछ बहुत दूर से चमक रही हैं।
और कुछ सितारे बनकर आसमान में चले गए हैं।
लेकिन मेरी जिंदगी के इस आसमान में—
तुम सब हमेशा रहोगे।
मेरी दोस्ती, मेरा सलाम, मेरा प्यार और मेरा आभार—तुम सबके नाम।
और बिन्नू…
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