What’s a completely useless fact you love sharing?
कुछ बातें ऐसी होती हैं जिनका हमारी ज़िंदगी में कोई काम नहीं होता। फिर भी उन्हें जानने और दूसरों को बताने में न जाने क्यों इतना मज़ा आता है!
एक बात बताइए।
क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि आपने कोई ऐसी अजीब-सी जानकारी पढ़ी हो, जिसे पढ़कर आप खुद तो हैरान हुए ही हों, लेकिन तुरंत आपका मन किया हो कि इसे किसी और को भी बताना चाहिए?
मसलन, आपने कहीं पढ़ लिया:
“क्या आपको पता है कि ऑक्टोपस के तीन दिल होते हैं?”
अब ज़रा सोचिए, इस जानकारी का आप क्या करेंगे?
क्या इससे आपकी नौकरी में प्रमोशन मिल जाएगा?
क्या इससे सब्ज़ी के दाम कम हो जाएँगे?
क्या इससे घर का बिजली बिल कम आएगा?
क्या इससे आपकी कोई पुरानी समस्या हल हो जाएगी?
बिल्कुल नहीं!
लेकिन फिर भी मन करता है कि किसी को बताऊँ।
और अगर कोई पास में बैठा हो, तो खुद को रोकना मुश्किल हो जाता है।
“अरे सुनो! एक बात बताऊँ?”
सामने वाला अभी ठीक से सुनने के लिए तैयार भी नहीं हुआ कि हम ऑक्टोपस के तीन दिलों की पूरी कहानी शुरू कर देते हैं!
बस, यही है बिल्कुल बेकार जानकारियों की मज़ेदार दुनिया!
हर दोस्तों की मंडली में एक ऐसा इंसान ज़रूर होता है!
अपने दोस्तों के बारे में सोचिए।
हर ग्रुप में एक ऐसा मित्र ज़रूर होता है, जिसके पास दुनिया भर की अजीबोगरीब जानकारियों का खज़ाना होता है।
उसे पता होता है कि शहद सही परिस्थितियों में हजारों साल तक खराब हुए बिना रह सकता है।
उसे यह भी मालूम होता है कि शुक्र ग्रह पर एक दिन उसके एक साल से भी लंबा होता है।
उसे पता होता है कि उल्लुओं के समूह को अंग्रेज़ी में Parliament कहते हैं।
और वह इन सब जानकारियों को ऐसे याद रखता है, जैसे अगले दिन इन्हीं पर परीक्षा होने वाली हो!
मज़े की बात यह है कि किसी ने उससे कभी ये जानकारियाँ माँगी भी नहीं होतीं।
बस, उसे सब पता होता है!
मान लीजिए, आप शाम को दोस्तों के साथ चाय की दुकान पर बैठे हैं।
चर्चा चल रही है। कोई क्रिकेट की बात कर रहा है, कोई महँगाई की, कोई मोहल्ले की नई शादी की और कोई अपने ऑफिस की परेशानी सुना रहा है।
तभी आपका यह ज्ञानी मित्र अचानक बोलता है:
“तुम लोगों को पता है, केला असल में बेरी की श्रेणी में आता है?”
सब उसे देखने लगते हैं।
एक मित्र पूछता है, “तो फिर स्ट्रॉबेरी क्या है?”
दूसरा बोलता है, “भाई, ये सब छोड़! पहले बता, चाय का पैसा कौन देगा?”
और फिर ठहाके लगने लगते हैं।
लेकिन हमारे ज्ञानी मित्र का काम पूरा हो चुका होता है।
एक और बेकार जानकारी दुनिया तक पहुँचा दी गई!
आखिर हमें ऐसी बातें बताने में इतना मज़ा क्यों आता है?
मुझे लगता है, इसका जवाब बहुत आसान है।
हमें ऐसी बातें दूसरों के साथ बाँटना अच्छा लगता है, जो हमें हैरान करती हैं या हँसाती हैं।
हर बार हमारा उद्देश्य किसी को ज्ञान देना नहीं होता।
कभी-कभी हम बस अपना छोटा-सा आश्चर्य किसी दूसरे के साथ बाँटना चाहते हैं।
मान लीजिए, आप मोबाइल चला रहे हैं। अचानक कोई मज़ेदार जानकारी पढ़ने को मिल गई।
आप मुस्कराए।
फिर किसी दोस्त का ख्याल आया।
तुरंत उसे भेज दिया और साथ में लिख दिया:
“ये पढ़ना! तुम्हें भी मज़ा आएगा!”
दोस्त ने पढ़ा, हँसा और जवाब दिया:
“तुम्हें ऐसी बेकार बातें मिलती कहाँ से हैं?”
आपका जवाब होगा:
“ज्ञान की कोई सीमा नहीं होती, मित्र!”
अब बताइए, इसमें बुरा क्या है?
सच कहूँ तो दोस्ती में ऐसी छोटी-छोटी बातें बहुत मायने रखती हैं।
कभी कोई मज़ेदार वीडियो, कभी पुरानी तस्वीर, कभी कोई चुटकुला और कभी ऐसी जानकारी, जिसका हमारी ज़िंदगी में कोई उपयोग नहीं होने वाला।
लेकिन इन्हीं बातों से बातचीत चलती रहती है।
कभी-कभी किसी अपने का सिर्फ इतना लिख देना कि “देखो, क्या मिला है!” भी चेहरे पर मुस्कान ले आता है।
व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी का तो जवाब ही नहीं!
हम भारतीयों ने इस आदत को एक अलग ही मुकाम पर पहुँचा दिया है।
हमारी अपनी यूनिवर्सिटी है।
न एडमिशन की ज़रूरत, न फीस की, न परीक्षा की और न ही डिग्री की।
यहाँ हर कोई प्रोफेसर है!
सुबह-सुबह परिवार के व्हाट्सऐप ग्रुप में एक संदेश आता है:
“केला खाने के बाद कभी पानी मत पीना!”
दूसरा संदेश आता है:
“इस संदेश को ग्यारह लोगों तक पहुँचाएँ, घर में सुख-समृद्धि आएगी!”
तीसरा संदेश किसी ऐसी नई वैज्ञानिक खोज के बारे में होता है, जिसे पढ़कर डॉक्टर भी सोच में पड़ जाएँ।
अब परिवार का ग्रुप देखिए।
एक अंकल लिखेंगे, “बहुत अच्छी जानकारी।”
एक आंटी कहेंगी, “मैं तो पहले से ही कहती थी।”
कोई हाथ जोड़ने वाला इमोजी भेज देगा।
और जिसने संदेश भेजा है, उसे लगेगा कि आज उसने समाज के लिए बहुत बड़ा काम कर दिया!
हालाँकि, एक बात याद रखनी चाहिए। हर वायरल संदेश सही नहीं होता। मज़ेदार जानकारी और सच में फर्क होता है। इसलिए कुछ भी आगे भेजने से पहले उसकी सच्चाई देख लेना अच्छा है।
जानकारी बेकार हो सकती है, लेकिन बातचीत नहीं!
याद कीजिए, जब हमारे पास मोबाइल और इंटरनेट नहीं हुआ करते थे।
दोस्तों के साथ बैठना, गली-मोहल्ले में गप्पें मारना, घर की छत पर देर तक बातें करना और बिना किसी खास विषय के हँसते रहना हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा हुआ करता था।
किसी को स्कूल का कोई किस्सा याद आ जाता।
कोई अपने दादाजी से सुनी हुई कहानी सुनाने लगता।
कोई अखबार में पढ़ी हुई अजीब जानकारी बताता।
फिर शुरू होती बहस, हँसी-मज़ाक और कभी-कभी ऐसी चर्चा जिसका कोई सिर-पैर ही नहीं होता था!
लेकिन मज़ा बहुत आता था।
न किसी को जल्दी होती थी, न कोई बार-बार घड़ी देखता था।
आज हमारे पास पढ़ने और देखने के लिए हजारों चीज़ें हैं, लेकिन कभी-कभी अपनों के साथ बैठकर खुलकर बातें करने का समय नहीं है।
शायद इसीलिए ऐसी छोटी-छोटी जानकारियाँ हमें अच्छी लगती हैं।
वे बातचीत शुरू करने का बहाना बन जाती हैं।
और कई बार उस जानकारी से कहीं अधिक खूबसूरत वह बातचीत होती है, जो उसके बाद शुरू होती है।
चलिए, एक और बेकार जानकारी हो जाए!
क्या आपको पता है कि शुक्र ग्रह पर एक दिन उसके एक साल से भी लंबा होता है?
शुक्र को अपनी धुरी पर एक चक्कर लगाने में पृथ्वी के लगभग 243 दिन लगते हैं, जबकि सूर्य का एक चक्कर लगाने में लगभग 225 दिन लगते हैं।
अब सोचिए, अगर आप शुक्र ग्रह पर रहते तो क्या होता?
आपका जन्मदिन आने से पहले एक दिन भी पूरा नहीं होता!
और जो लोग हमेशा देर से आते हैं, उनके लिए तो यह बहुत अच्छी जगह होती।
“भाई, मैं लेट नहीं हूँ। हमारे ग्रह पर समय की परिभाषा ही अलग है!”
अब ऐसी जानकारी को याद रखने में क्या हर्ज है?
हर बात का कोई फायदा होना ज़रूरी नहीं!
हम अपनी ज़िंदगी में हर समय कुछ न कुछ हासिल करने की कोशिश में लगे रहते हैं।
कुछ नया सीखना है, पैसे कमाने हैं, आगे बढ़ना है, काम पूरा करना है और हर मिनट का सही इस्तेमाल करना है।
यह सब ज़रूरी भी है।
लेकिन ज़िंदगी में थोड़ा बेवजह हँसना भी ज़रूरी है।
किसी पुराने दोस्त से बिना मतलब की बातें करना।
शाम की चाय पर कोई बेवकूफी भरा चुटकुला सुनाना।
परिवार के व्हाट्सऐप ग्रुप में कोई अजीब-सी जानकारी भेजना।
किसी ऐसी बात पर हँसना, जिसका हमारी ज़िंदगी में कोई महत्व ही नहीं है।
इन बातों से बैंक बैलेंस नहीं बढ़ता, न कोई उपलब्धि मिलती है।
लेकिन दिल थोड़ा हल्का हो जाता है।
चेहरे पर मुस्कान आ जाती है।
और कभी-कभी यही बहुत होता है!
इसलिए अगली बार जब कोई आपको कोई बिल्कुल बेकार-सी जानकारी बताए, तो उसे अनसुना मत कीजिए।
थोड़ा ध्यान से सुनिए।
मुस्कराइए।
उससे एक और बेवकूफी भरा सवाल पूछिए।
और फिर अपनी तरफ से भी कोई ऐसी ही जानकारी सुना दीजिए।
आखिर ज़िंदगी में गंभीर समस्याओं की कोई कमी नहीं है। हर बातचीत को गंभीर बनाने की क्या ज़रूरत है?
अब आपकी बारी!
मुझे पूरा विश्वास है कि आपके पास भी ऐसी कोई न कोई जानकारी ज़रूर होगी।
कोई अजीब बात, कोई मज़ेदार तथ्य, कोई ऐसी जानकारी जिसे जानकर आप खुद हैरान रह गए हों।
तो देर किस बात की?
कमेंट में बताइए।
देखते हैं, किसके पास है सबसे बड़ा बेकार जानकारियों का खज़ाना!
और हाँ, एक बात याद रखिए:
जानकारी भले ही बिल्कुल बेकार हो, लेकिन उसे सुनकर किसी के चेहरे पर आई मुस्कान कभी बेकार नहीं होती!
What’s a completely useless fact you love sharing? कुछ बातें ऐसी होती हैं जिनका हमारी ज़िंदगी में कोई काम नहीं होता। फिर भी उन्हें जानने और दूसरों को बताने में न जाने क्यों इतना मज़ा आता है! एक बात बताइए। क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि आपने कोई ऐसी अजीब-सी जानकारी पढ़ी हो,…
By
—
एक बिल्कुल बेकार जानकारी! लेकिन दूसरों को बताने में बड़ा मज़ा आता है!
Discover more from Wanderings with Nikhil
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
This story is incomplete without your thoughts—drop them below!