Wanderings with Nikhil

Navigating Life's Journey, One Adventure at a Time.

nostalgic Indian culture storyteller

The content highlights the spiritual significance of Neem Karoli Baba and his ashrams, notably in Kainchi Dham and Hanuman Setu. It shares his teachings emphasizing love, service, remembrance of God, and truth, alongside miraculous stories that showcase his divine presence. His influence transcends borders, inspiring countless devotees globally.

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नीब करौरी बाबा

नीब करौरी बाबा और कैंची धाम से हनुमान सेतु तक भक्ति, चमत्कार और आत्मिक शांति

नीब करौरी बाबा  जी महराज हनुमान जी छत्र-छाया में

सबसे प्रेम करो · सबकी सेवा करो · ईश्वर को याद रखो · सत्य बोलो” नीब करौरी बाबा

नीब करौरी बाबा और कैंची धाम

एक यात्रा जो नक्शे पर नहीं, हृदय में शुरू होती है

क्या आपने कभी अनुभव किया है —

जब पहाड़ों की हवाएँ भी “राम-राम” का जाप करती प्रतीत होती हैं

एक अजीब-सी खिंचाव, एक अनजाना बुलावा, किसी नाम की ओर, किसी धाम की ओर?

कुमाऊँ की पहाड़ियों से लेकर सिलिकॉन वैली तक, हार्वर्ड के व्याख्यान-कक्षों से लेकर भारत के साधारण गाँवों तक —

लाखों लोगों ने यही अनुभव बताया है, जब उनके जीवन में पहली बार एक नाम प्रवेश किया: 

नीब करौरी बाबा

आदरणीय नीब करौरी बाबा के बारे में यह ब्लॉग एक भावमयी तीर्थयात्रा है —

शब्दों में।

नैनीताल के घने जंगलों में बसे कैंची धाम से लेकर लखनऊ की गोमती नदी के तट पर स्थित हनुमान सेतु मंदिर तक, वृन्दावन की पवित्र भूमि के समाधि मंदिर से लेकर नीब करौरी बाबा के गाँव की मिट्टी तक —

यह भारतीयसंस्कृति -आध्यात्मिकयात्रा यात्रा उस अनंत प्रेम की कहानी है, जिसने महाराज नीब करौरी बाबा के बारे में इस पृथ्वी पर साकार किया।

मंगल भवन अमंगल हार
द्रवहु सो दसरथ अजिर बिहारी॥

जो मंगलमय हैं और अमंगल का नाश करने वाले हैं — दशरथ के आंगन में विचरने वाले वे प्रभु हम पर कृपा करें।
— रामचरितमानस, भारतीयसंस्कृति

नीब करौरी बाबा — एक रहस्यमय संत का परिचय

नीब करौरी बाबा का नाम भारत के महान संतों में अत्यंत श्रद्धा से लिया जाता है। उनका जन्म उत्तर प्रदेश में हुआ माना जाता है। उनका सांसारिक नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा था।

हालाँकि कम आयु में ही उन्होंने संसार की क्षणभंगुरता को समझ लिया और इसलिए आध्यात्मिक मार्ग अपना लिया।

उत्तर प्रदेश के नीब करौरी गाँव के समीप उन्होंने लगभग बीस वर्ष साधना की। इसी गाँव के नाम से वे “नीब करौरी बाबा” के नाम से प्रसिद्ध हुए। उनका उपदेश अत्यंत सरल था — सबसे प्रेम करो, सबकी सेवा करो, ईश्वर को याद रखो, सच बोलो। पर इस सरलता में अनंत गहराई थी।

यही तीन वाक्य आज भी करोड़ों भक्तों के जीवन का मार्गद हनुमान जी का द संबंध

नीब करौरी बाबा को हनुमान जी का परम भक्त माना जाता है, और उनके अधिकांश आश्रमों और मंदिरों में हनुमान जी की विशाल प्रतिमाएँ स्थापित हैं।

भक्तों का विश्वास है कि बाबा के जीवन में हनुमान जी की कृपा हर क्षण विद्यमान थी।

रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं—

राम दूत अतुलित बल धामा।
अंजनि पुत्र पवनसुत नामा।।”

हनुमान जी केवल शक्ति के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि सेवा, समर्पण और विनम्रता के भी प्रतीक हैं।इसलिए नीब करौरी बाबा का जीवन भी इन्हीं गुणों से ओतप्रोत था।

चूंकि नीब करौरी बाबा महराज को हनुमान जी का अवतार माना जाता है , तो जाहिर है उनके बारे में ढेरों चमत्कारिक कहानियां प्रचलित हैं। उनमे से कुछ आपके लिए यहाँ दी जा रही हैं. आनंद लीजिये –

ट्रेन का चमत्कार — पहली प्रसिद्ध कथा

एक बार नीब करौरी बाबाजी बिना टिकट ट्रेन में यात्रा कर रहे थे। टिकट-कलेक्टर ने उन्हें उतार दिया। परंतु अद्भुत बात यह हुई कि ट्रेन आगे बढ़ने से मना कर दी — इंजन नहीं चला, कितने भी यत्न किए। जब स्टेशनमास्टर ने बाबाजी से पुनः आरूढ़ होने की विनती की, तभी ट्रेन चली।

यह उनके सार्वजनिक जीवन का पहला प्रसिद्ध चमत्कार माना जाता है। उसके बाद रेलवे अधिकारियों ने उन्हें मुफ्त यात्रा की अनुमति दे दी।

सुमिरि पवनसुत पावन नामू।
अपनें बस करि राखे रामू॥

पवनपुत्र के पावन नाम का स्मरण करने से स्वयं राम भी उनके वश में हो जाते हैं।

🫙 घी का चमत्कार

एक भण्डारे में रसोई में घी समाप्त हो गया। हजारों भक्तों का प्रसाद अधूरा था।नीब करौरी बाबा ने शांतचित्त होकर कहा —

“कोसी नदी से पानी लाओ और घी समझकर पकाओ।”

भक्त चकित रह गए, किंतु आज्ञा मानी। और अद्भुत! भोजन न केवल पका, बल्कि जितना कभी घी में पकाए गए भोजन में था उससे भी अधिक स्वादिष्ट निकला।

जो उस दिन वहाँ थे, उन्होंने महाराज-जी की दिव्यता पर कभी संदेह नहीं किया।

🪨 तैरती हनुमान मूर्ति

जब कैंची धाम में संगमरमर की हनुमान मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा हो रही थी, तब स्थापना के समय मूर्ति अचानक हवा में उठने लगी —

पीठिका से ऊपर उड़ने लगी।

पुजारी स्तब्ध रह गए।

तब नीब करौरी बाबाजी शांति से आगे बढ़े, अपना हाथ मूर्ति पर रखा, और वह धीरे-धीरे अपने स्थान पर स्थिर हो गई।

श्रद्धालुओं का मानना है कि वह मूर्ति आज भी असाधारण दिव्य ऊर्जा से परिपूर्ण है।

बिपति काटिए हनुमान।
जो कोउ तुम्हैं ध्यावहीं पावहीं सब सुख।

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥

हे हनुमान जी! ज्ञान और गुणों के सागर, आपकी जय हो! हे कपीश! तीनों लोकों को प्रकाशित करने वाले, आपकी जय हो!
— हनुमान चालीसा, तुलसीदास

कैंची धाम, नैनीताल — जहाँ पर्वत झुककर प्रणाम करते हैं

बाबा नीब करौरी जी- कैची धाम

उत्तराखण्ड के कुमाऊँ क्षेत्र में, नैनीताल से लगभग 17 किलोमीटर दूर नैनीताल-अल्मोड़ा मार्ग पर, 1,400 मीटर की ऊँचाई पर बसा है —

 कैंची धाम

“कैंची” नाम इसलिए पड़ा क्योंकि यहाँ सड़क के दो तीखे मोड़ कैंची के आकार के हैं — जैसे दैवी कैंची ने यहाँ आने वाले श्रद्धालु को संसार के बंधनों से काट दिया हो।

1960 के दशक की शुरुआत में जब नीब करौरी बाबाजी पहली बार कोसी नदी के किनारे इस वन-प्रांत में आए, तब यहाँ मात्र पंद्रह घर थे। परंतु उन्होंने इस भूमि में एक अद्भुत दिव्य ऊर्जा को पहचाना — एक स्थान जहाँ हनुमान जी की शक्ति विशेष रूप से प्रकट थी। अतः यहाँ आश्रम की स्थापना हुई। 

15 जून 1964 को आश्रम का आधिकारिक उद्घाटन हुआ — और वही तिथि आज भी प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालुओं के साथ भण्डारे के रूप में मनाई जाती है।

सुबह की आरती, मंदिर की घंटियाँ, देवदार के वृक्षों की सुगंध और पहाड़ों से उतरती ठंडी हवा—यह सब मिलकर ऐसा वातावरण बनाते हैं जहाँ पहुँचकर मन स्वतः शांत हो जाता है।

यहाँ बैठकर ऐसा महसूस होता है जैसे संसार की सारी चिंताएँ धीरे-धीरे पिघल रही हों।

नीब करौरी बाबा महाराज को हनुमान जी का परम भक्त माना जाता है। उनके अधिकांश आश्रमों और मंदिरों में हनुमान जी की विशाल प्रतिमाएँ स्थापित हैं।

क्यों बार-बार बुलाते हैं बाबा?

कई भक्त कहते हैं—

“कैंची धाम हम नहीं जाते, नीब करौरी बाबा बुलाते हैं।”

शायद यही इस स्थान की सबसे बड़ी विशेषता है।

यहाँ आने वाला व्यक्ति केवल दर्शन करके नहीं लौटता।

वह अपने साथ शांति, विश्वास, प्रेम और सेवा का संदेश लेकर लौटता है।

जब हम नीब करौरी बाबा महाराज के धामों की यात्रा करते हैं, तब हम केवल मंदिरों के दर्शन नहीं करते,

बल्कि उस आध्यात्मिक परंपरा को महसूस करते हैं जो हमें मानवता, करुणा और ईश्वर के निकट ले जाती है।

जय श्री राम।

जय हनुमान।

जय गुरुदेव बाबा नीब करौरी महाराज।

वार्षिक भण्डारा — आत्मा का उत्सव

प्रतिवर्ष 15 जून को कैंची धाम में विशाल भण्डारे का आयोजन होता है —

जहाँ लाखों श्रद्धालु जाति, धर्म, देश की सीमाओं को भुलाकर एक पंक्ति में बैठते हैं और सरल प्रसाद ग्रहण करते हैं। किसी को लौटाया नहीं जाता। एक संकरी पर्वत घाटी में लाखों लोगों को भोजन कराना स्वयं में एक दिव्य चमत्कार है।

हनुमान सेतु, लखनऊ — मनोकामना पूर्ण करने वाले हनुमान

बाबा नीब करौरी जी- हनुमान सेतु-लखनऊ

लखनऊ की पावन गोमती नदी के तट पर, शहशाह कोठी के निकट, एक ऐसा मंदिर है जिसे बाबा नीब करौरी महाराज ने स्वयं बनवाया —

 हनुमान सेतु पर स्थित संकट मोचन हनुमान मंदिर

गोमती नदी के तट पर स्थित हनुमान सेतु मंदिर लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र है।

लखनऊ का शायद ही कोई परिवार होगा जिसने कभी न कभी यहाँ माथा न टेका हो।

मंगलवार और शनिवार को यहाँ श्रद्धालुओं की लंबी कतारें दिखाई देती हैं।

छात्र परीक्षा से पहले आते हैं।

व्यापारी नया कार्य शुरू करने से पहले आते हैं।

परिवार सुख-समृद्धि की कामना लेकर आते हैं।

हर कोई अपने साथ विश्वास लेकर आता है।

कहा जाता है कि तत्कालीन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी इस निर्माण के इच्छुक नहीं थे, किंतु बाबाजी की दैवी इच्छाशक्ति के सम्मुख कोई बाधा नहीं टिक सकी।

26 जनवरी 1967 को उद्घाटित इस आश्रम में दो नीब करौरी बाबा की मूर्तियाँ, दो हनुमान मूर्तियाँ और दो शिवलिंग हैं।

दीवारों पर राम-सीता, हनुमान और वानर-सेना के भव्य भित्तिचित्र अंकित हैं।

महाराज-जी ने इस हनुमान के बारे में कहा था — “यह समस्त हनुमानों का गवर्नर-जनरल है।”

और सबसे विशेष परम्परा: प्रतिदिन रात्रि में सोने से पूर्व मंदिर के पुजारी, देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं के पत्रों को हनुमान जी के सम्मुख पढ़ते हैं —

उनकी मनोकामनाओं को, उनकी पीड़ाओं को।

बाबाजी का विश्वास था: हनुमान जी स्वयं सुनते हैं।

बिपति काटिए हनुमान।
जो कोउ तुम्हैं ध्यावहीं पावहीं सब सुख।

हे हनुमान जी! आप विपत्ति का नाश करते हैं। जो भी आपका ध्यान करता है, उसे सभी सुख प्राप्त होते हैं।
— रामचरितमानस, सुंदरकाण्ड

भारत में महाराज-जी के अन्य धाम — कृपा की माला

🌺 वृन्दावन आश्रम — समाधि मंदिर

बाबा नीब करौरी जी- वृंदावन आश्रम

वृन्दावन —

भगवान कृष्ण की पावन भूमि —

वह स्थान है जहाँ बाबाजी ने 11 सितम्बर 1973 को महासमाधि ग्रहण की।

कहते हैं कि जाते-जाते भी उनके होठों पर राम-नाम था। यहाँ का समाधि मंदिर एक विशेष आध्यात्मिक वातावरण से भरा है —

शांत, गहरा, अंतर्मुखी। वृन्दावन आश्रम →

काकड़ीघाट: जहाँ स्वामी विवेकानंद को मिला आत्मबोध

कैंची धाम के समीप स्थित काकड़ीघाट भी अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।

मान्यता है कि यहाँ स्वामी विवेकानंद को गहन आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त हुई थी।

बाबा भी इस स्थान को अत्यंत पवित्र मानते थे।

नदी के किनारे बैठकर ध्यान करने पर आज भी साधक एक विशेष शांति का अनुभव करते हैं।

🏔️ ऋषिकेश आश्रम

बाबा नीब करौरी जी- ऋषिकेश आश्रम

गंगा के तट पर, योग की विश्व-राजधानी ऋषिकेश में बाबाजी का आश्रम एक और दिव्य तीर्थ है। यहाँ अनेक विदेशी शिष्यों ने पहली बार महाराज-जी की ऊर्जा का अनुभव किया।

🏙️ दिल्ली आश्रम

बाबा नीब करौरी जी- दिल्ली  आश्रम

एक सूखे भूखण्ड पर बाबाजी के आशीर्वाद से जल प्रकट हुआ — और उसी भूमि पर एक भव्य हनुमान मंदिर स्थापित हुआ, जिसका उद्घाटन 1971 की रामनवमी को हुआ।

🏔️ शिमला — संकट मोचन मंदिर

बाबा नीब करौरी जी मंदिर - शिमला

1966 में बाबाजी के निर्देश पर शिमला में संकट मोचन हनुमान मंदिर स्थापित किया गया। पर्वतीय शांति में बाबाजी की उपस्थिति यहाँ भी प्रत्यक्ष अनुभव होती

नीब करौरी गाँव — कृपा का मूल

बाबा नीब करौरी जी मंदिर - नीब करौरी गांव

उत्तर प्रदेश का वह पावन गाँव जहाँ बाबाजी ने लगभग बीस वर्षों तक तपस्या की — और जहाँ उन्होंने स्वयं अपने हाथों से हनुमान जी की मूर्ति बनाई — वह आज भी एक विशेष तीर्थस्थल है।

सकल सुमंगल दायक रघुनायक गुन गान।
सादर सुनहिं ते तरहिं भव सिंधु बिनु जलजान॥

रघुनायक की गुण-कथा समस्त शुभ मंगल की दायिनी है। जो इसे श्रद्धापूर्वक सुनते हैं, वे बिना नाव के भी भवसागर पार कर लेते हैं।
— रामचरितमानस, बालकाण्ड

सिलिकॉन वैली से हिमालय तक — विदेशी शिष्यों की कहानियाँ

राम दास (रिचर्ड अल्पर्ट) — जो हार्वर्ड से भटकते हुए भारत आए

राम दास, मूल नाम रिचर्ड अल्पर्ट, एक हार्वर्ड मनोवैज्ञानिक थे — पश्चिमी सफलता के शिखर पर, फिर भी आत्मा में खालीपन। 1967 में भारत आए। जब महाराज-जी के सामने पहुँचे, तो बाबाजी ने उनकी माँ की मृत्यु, उनकी गुप्त पीड़ाएँ — वह सब कह दिया जो किसी को बताया नहीं था। रिचर्ड अल्पर्ट वहीं विसर्जित हो गए। राम दास — “ईश्वर के सेवक” — का जन्म हुआ। उन्होंने Be Here Now और Miracle of Love जैसी पुस्तकें लिखीं जिनसे लाखों पश्चिमी लोग महाराज-जी तक पहुँचे। राम दास फाउण्डेशन →

कृष्ण दास — पश्चिम में भक्ति का स्वर

कृष्ण दास, मूल नाम जेफ्री कागल, राम दास के माध्यम से महाराज-जी तक पहुँचे। उनकी गहरी, भावमयी आवाज़ में हनुमान चालीसा और राम-नाम अमेरिका-यूरोप के संगीत-सभागारों में गूँजे। उन्होंने कहा है — “बाबाजी के साथ बिताया समय मेरे पूरे जीवन की नींव है।” कृष्ण दास की वेबसाइट →

स्टीव जॉब्स — जो गुरु को ढूँढने आए, दर्शन पाकर लौटे

1974 में स्टीव जॉब्स अपने मित्र के साथ भारत आए — राम दास की पुस्तकों से प्रेरित होकर, महाराज-जी का दर्शन पाने की उम्मीद में। परंतु वे एक वर्ष देर से पहुँचे। बाबाजी 1973 में ही महासमाधि ले चुके थे। फिर भी कैंची धाम के वातावरण ने उन्हें गहरे तक छुआ। सादगी, एकाग्रता, आध्यात्मिक अन्तर्ज्ञान — जो एप्पल के डिज़ाइन-दर्शन की नींव बनी — वह इसी यात्रा से आई। कहा जाता है कि जीवन के अंतिम दिनों में जॉब्स के पास बाबाजी की तस्वीर थी।

मार्क ज़करबर्ग का कैंची धाम आगमन, 2015

2015 में जब फेसबुक एक आंतरिक संकट से गुज़र रहा था, तब मार्क ज़करबर्ग — स्टीव जॉब्स की सलाह पर — कैंची धाम पहुँचे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चर्चा में बताया कि यह यात्रा उनके लिए “अत्यंत अर्थपूर्ण” थी। उन्होंने प्रेम और मानवसेवा के बाबाजी के दर्शन को आत्मसात किया और फेसबुक की दिशा को नई दृष्टि दी। इसके अतिरिक्त, गूगल के लैरी पेज और ईबे के सह-संस्थापक जेफ्री स्कॉल भी इस आश्रम तक पहुँचे।

जो सुमिरत सिधि होइ गन नायक करिबर बदन।
करहु अनुग्रह सोइ बुद्धि रासि सुभ गुन सदन॥

जिनका स्मरण करते ही सिद्धि प्राप्त होती है, वे गणनायक गजानन हम पर अनुग्रह करें।
— रामचरितमानस, मंगलाचरण

महाराज-जी का आध्यात्मिक दर्शन — प्रेम ही परम साधना

बाबाजी का उपदेश किसी जटिल दर्शन में नहीं था। उनके चार सूत्र थे — सबसे प्रेम करो। सबकी सेवा करो। ईश्वर को याद रखो। सच बोलो। बस। इतने सरल शब्दों में उन्होंने जीवन की पूरी आध्यात्मिक नींव रख दी।

वे प्रायः कहते थे — सब एक हैं — यह वाक्य उनके विश्व-दर्शन का सार था। एक गरीब भिखारी और एक राज्यपाल उनके सामने बराबर बैठते थे —

और दोनों को यही अनुभव होता था कि वे वास्तव में देखे, सुने, और प्रेम किए गए हैं।

यही उनकी दिव्यता थी।

उनका हनुमान जी से सम्बन्ध केवल भक्तिभाव नहीं था — अनेक श्रद्धालुओं का विश्वास था कि वे स्वयं हनुमान जी के अवतार थे। उनकी कम्बल — “तकिया” — में लिपटी वह छवि, हनुमान जी की निर्भय सादगी का साकार रूप थी।

सेवक सेव्य भाव बिनु भव न तरिअ उरगारि।
भजहु राम पद पंकज अस सिद्धांत बिचारि॥

हे गरुड़! सेवक और सेव्य का भाव बिना भवसागर नहीं तरा जा सकता। अतः इस सिद्धांत को समझकर राम के चरण-कमलों का भजन करो।
— रामचरितमानस

रामचरितमानस और बाबा की शिक्षाएँ

बाबा के जीवन का मूल आधार रामभक्ति था।

रामचरितमानस की यह चौपाई उनके संदेश का सार प्रस्तुत करती है—

“परहित सरिस धरम नहि भाई।
पर पीड़ा सम नहि अधमाई।।”

दूसरों की सेवा ही सच्चा धर्म है।

बाबा भी यही कहते थे कि भूखे को भोजन देना, दुखी को सांत्वना देना और जरूरतमंद की सहायता करना ही सबसे बड़ी पूजा है।

कैंची धाम का भविष्य — एक विस्तरित कृपा

महाराज-जी की विरासत स्थिर नहीं, जीवंत और प्रवाहमान है। हाल के वर्षों में कैंची धाम की वैश्विक प्रसिद्धि तेज़ी से बढ़ी है।

सिलिकॉन वैली के दिग्गजों की यात्राएँ, राम दास और कृष्ण दास जैसे शिष्यों की पुस्तकें और संगीत, और नई पीढ़ी की प्रामाणिक आध्यात्मिकता की खोज —

इन सबने मिलकर इस धाम को भारत के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों में अग्रणी बना दिया है।

उत्तराखण्ड पर्यटन विभाग ने कैंची धाम को आध्यात्मिक पर्यटन सर्किट का केंद्र मानते हुए नई सड़कें, बेहतर आवास सुविधाएँ और डिजिटल पहुँच विकसित की है।

अमेरिका के न्यू मैक्सिको में ताओस हनुमान मंदिर और जर्मनी के वृन्दावन आश्रम जैसे केंद्रों के माध्यम से महाराज-जी की कृपा महासागरों को पार कर चुकी है। उत्तराखण्ड पर्यटन →

भव भेषज रघुनाथ जसु सुनहिं जे नर अरु नारि।
तिन्ह कर सकल मनोरथ सिद्ध करहिं त्रिसिरारि॥

जो नर-नारी रघुनाथ की महिमा — भवरोग की औषधि — सुनते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएँ त्रिनेत्रधारी शिव पूर्ण करते हैं।
— रामचरितमानस, उत्तरकाण्ड

खाली हाथ जाइए, भरा हृदय लेकर लौटिए

बाबा नीब करौरी महाराज के धामों की यात्रा केवल एक तीर्थयात्रा नहीं है —

यह प्रेम की एक जीती-जागती परम्परा में सम्मिलित होना है।

चाहे आप कैंची धाम के तीखे मोड़ों से गुज़रते हुए पहाड़ी जंगल में प्रवेश करें,

या लखनऊ की गोमती के तट पर “समस्त हनुमानों के गवर्नर-जनरल” के सम्मुख नतमस्तक हों, या वृन्दावन के समाधि मंदिर में आँखें मूँदकर बैठें —

अनुभव एक ही है: आप देखे जाते हैं, थामे जाते हैं, और प्रेम किए जाते हैं।

महाराज-जी ने कहा था — सबसे प्रेम करो। सबकी सेवा करो। ईश्वर को याद रखो। सच बोलो। ये चार वाक्य केवल उपदेश नहीं हैं —

ये एक पूर्ण जीवन-दर्शन हैं। और चाहे आप एक श्रद्धालु हिन्दू हों, एक जिज्ञासु विदेशी हों, एक टेक उद्यमी हों, या बस एक थका हुआ मनुष्य — बाबाजी के धाम किसी से परिचय-पत्र नहीं माँगते। वे बस यही कहते हैं: आओ। बाकी सब वे स्वयं सँभाल लेते हैं।

🙏 जय हनुमान जी की · Jai Maharaj-ji 🙏

📎 महत्वपूर्ण लिंक — तीर्थयात्रा की योजना बनाएँ

जय श्री राम · जय हनुमान

A devotional blog on the sacred Dhams of Baba Neem Karoli Maharaj · बाबा नीब करौरी महाराज के धामों पर एक भावमयी यात्रा


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3 responses to “नीब करौरी बाबा”

  1. […] Lucknow Heritage Architecture: A Living Legacy That Still Speaks […]

    1. Nikhilbinnu Avatar

      thanks

  2. […] अवध की संस्कृति और परंपराएँ […]

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