
मोबाइल को मेज़ पर छोड़ आया हूँ,
आज खुद को बाहर ले आया हूँ।
न कोई रील, न कोई शोर,
बस धूप, हवा और थोड़ा-सा मैं।
आजकल मोबाइल हमारा सबसे आज्ञाकारी दोस्त है—
न सोने देता है, न उठने देता है,
और हर पाँच मिनट में पूछता है:
“कुछ नया देखोगे?”
डिजिटल डिटॉक्स डे उसी दोस्त से एक दिन की छुट्टी लेने का नाम है।
न नाराज़गी, न दुश्मनी—
बस थोड़ी दूरी, ताकि नज़दीकी बनी रहे।
सुबह: जब अलार्म नहीं, मन जगता है
आज मोबाइल नहीं बोलेगा—
“उठो, मीटिंग है।”
आज मन बोलेगा—
“उठो, ज़िंदगी है।”
चाय के साथ धूप,
खिड़की से आती हवा,
और बिना नोटिफिकेशन की शांति—
यही असली लग्ज़री है।
दो स्क्रीन के बीच खोई किताब
आज उंगलियाँ स्क्रॉल नहीं करेंगी,
आज पन्ने पलटेंगी।
किताब पढ़ते हुए
बीच-बीच में मोबाइल देखने की आदत
आज शर्मिंदा हो जाएगी।
डायरी में लिखिए—
“मैं ठीक हूँ… या सिर्फ़ व्यस्त?”
बाहर की दुनिया अभी भी HD है
पार्क में टहलते हुए
पेड़ों ने शिकायत की—
“बहुत दिन बाद याद किया।”
लोगों के चेहरे,
कुत्तों की दौड़,
बच्चों की हँसी—
ये सब बिना इंटरनेट के भी चल रहा है।
हाथ व्यस्त, दिमाग़ शांत
खाना बनाइए—
जल भी जाए तो कोई बात नहीं,
कम से कम रील नहीं जली।
अलमारी साफ़ कीजिए,
पुरानी तस्वीरें देखिए,
और खुद से मिलिए—
जो कहीं नोटिफिकेशन के नीचे दब गया था।
रिश्ते: बिना “देखो ज़रा” के
आज बातचीत में
बीच-बीच में फोन नहीं बोलेगा—
“एक मिनट…”
लूडो, ताश, अंताक्षरी
और वो हँसी
जो मोबाइल कैमरे में कभी कैद नहीं होती।
शाम: बिना कैमरा, बस आँखें
सूरज डूब रहा है—
कृपया स्टोरी मत डालिए।
बस देखिए।
एक दिया जलाइए
और खुद से पूछिए—
क्या मैं वाकई बिज़ी था
या बस ऑनलाइन?
रात: सुकून वाली नींद
सोने से पहले तीन शुक्रिया लिखिए।
मोबाइल को दूर रखिए।
आज नींद आएगी—
क्योंकि दिमाग़ दिन भर चार्ज नहीं हुआ।
😄
स्क्रीन से हटकर जो दुनिया दिखी आज,
वो किसी फ़िल्टर की मोहताज नहीं थी।
हम ही भूल गए थे उसे देखना,
वरना ज़िंदगी कभी ऑफ़लाइन नहीं थी।
अपने आस पास देखता हूँ तो सभी ओर लोग मोबाइल और सोशल मीडिया में ही लगे रहते हैं. नकली हंसी, नकली दोस्ती , और नकली concern ने हमें पूरी तरह से एक नकली दुनियां का alien बना दिया है जिसका अपने चारों ओर के जीवन से कोई सरो कार ही नहीं है. यहाँ लिखे छोटे छोटे उपाए जब हमने खुद के जीवन में उतारे तो पता चला कि ज़िन्दगी कितनी खूबसूरत है —और कितनी खूबसूरत है हमारी दुनिया , हमारे रिश्ते और हमारे लोग। इन्हे कभी दूर मत जाने दें. अपने पास रोक लें.
ब्लॉग अच्छा लगे तो अपने अनुभव भी शेयर करें। ..हमसे …सभी से. जहाँ इसकी सबसे ज्यादा जरूरत हो.
Goodluck.
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