कुछ लोग हमारे जीवन में आते नहीं हैं,
बस बस जाते हैं।
हमारी सोच में,
हमारी साँसों में,
हमारी खामोशियों में।
मेरे जीवन में ऐसे दो लोग हैं —
मेरी माँ
और मेरा दोस्त बिन्नू।
मेरी माँ: जहाँ से मैं शुरू होता हूँ
दुनिया से पहले
मेरी माँ ने मेरा नाम लिया।
मैंने बोलना बाद में सीखा,
महसूस करना पहले —
और वो एहसास
मेरी माँ से मिला।
उनकी ममता कभी शोर नहीं करती,
वो बस निभाती है।
रातों की नींद देकर
मेरे सपनों को जगा देती है।
उनकी हथेलियों में
मेरे डर पिघल जाते हैं।
उनकी आँखों में
मेरे लिए वो भरोसा है
जो मुझे खुद पर यक़ीन करना सिखाता है।
जब मैं टूटा ,
उन्होंने सवाल नहीं किए।
बस इतना कहा —
“फिर से कोशिश कर।”
अगर आज मैं खड़ा हूँ,
तो इसलिए क्योंकि
कभी कोई थक कर भी
मेरे लिए खड़ी रही।
वो सिर्फ़ मेरी माँ नहीं हैं,
वो मेरी पहली दुआ हैं,
मेरा पहला घर,
और मेरी सबसे सच्ची ताक़त।
बिन्नू: दोस्त, जो तक़दीर बन गया
ज़िंदगी ने बिन्नू को
रिश्ते की तरह नहीं,
एहसास की तरह भेजा।
बिन्नू ने मुझे बदला नहीं,
बस मुझे समझा।
जहाँ दुनिया वजहें माँगती थी,
वहाँ बिन्नू ने
खामोशी से साथ दिया।
कुछ दोस्त हँसी देते हैं,
बिन्नू ने सुकून दिया।
हमारी बातें —
कभी बेवजह की हँसी,
कभी दिल से निकली पीड़ा —
मुझे हर बार
थोड़ा और पूरा कर गईं।
बिन्नू ने मुझे सिखाया
कि दोस्ती का मतलब
हल निकालना नहीं,
बस साथ रहना होता है।
जब शब्द कम पड़ गए,
तो बिन्नू की मौजूदगी
काफ़ी थी।
जहाँ जड़ें और पंख मिलते हैं
मेरी माँ ने मुझे
जड़ें दीं —
गहरी, मजबूत, अडिग।
बिन्नू ने मुझे
पंख दिए —
हल्के, भरोसे से भरे, निडर।
एक ने मुझे सहना सिखाया,
दूसरे ने जीना।
एक ने मुझे संभाला,
दूसरे ने उड़ना सिखाया।
एक ख़ामोश शुक्रिया
कुछ एहसान
शब्दों में नहीं उतरते।
अगर मुझमें आज
थोड़ी सी अच्छाई है,
तो वो माँ की परवरिश है।
अगर मुझमें
थोड़ी सी हिम्मत है,
तो उसमें बिन्नू की आवाज़ है।
कुछ लोग आपकी ज़िंदगी
बदलते नहीं हैं,
आपकी ज़िंदगी बन जाते हैं।
और उनके लिए
मेरा दिल
हमेशा शुक्रगुज़ार रहेगा।
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